फंडिंग रेट एक विशेष मैकेनिज्म है जिसे परपेचुअल स्वैप मार्केट में लागू किया जाता है। इसे मुख्य रूप से परपेचुअल कॉन्ट्रैक्ट की प्राइजेस और स्पॉट प्राइजेस के बीच के अंतर को कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। फंडिंग रेट्स या तो लॉन्ग या शॉर्ट ट्रेडर्स को किए गए आवधिक पेमेंट्स हैं, जिन्हें परपेचुअल कॉन्ट्रैक्ट की प्राइजेस और स्पॉट प्राइजेस के बीच के अंतर के आधार पर केल्कूलेट किया जाता है।

 

फंडिंग रेट्स और फंडिंग फीस की विशेषताएं

1.    फंडिंग फीस ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म द्वारा ली जाने वाली फीस नहीं है, बल्कि परपेचुअल स्वैप ट्रेडर्स के बीच किया गया पेमेंट है।

2.    फंडिंग रेट्स बनाम फंडिंग फीस: जब फंडिंग का रेट पॉजीटिव होता है, तो ऐसे ट्रेडर्स जो परपेचुअल कॉन्ट्रैक्ट (बायर्स) पर लॉन्ग हैं, विरोधी पक्ष (सेलर्स) के ट्रेडर्स को एक फंडिंग फीस का भुगतान करेंगे; जब फंडिंग का रेट निगेटिव होता है, ऐसे ट्रेडर्स जो परपेचुअल कॉन्ट्रैक्ट पर शॉर्ट हैं, वे लॉन्ग ट्रेडर्स को फंडिंग फीस का भुगतान करेंगे; जब फंडिंग का रेट जीरो होता है, तो दोनों पार्टियों के बीच कोई फंडिंग फीस देने की जरूरत नहीं होती है।

3.    ट्रेडर्स द्वारा भुगतान या प्राप्त करने के लिए जरूरी फंडिंग फीस को केल्कूलेट करने के लिए हर एक एक्सचेंज का अपना टाइमर होता है। अगर ट्रेडर्स के पास फंडिंग के समय कोई पोजीशन नहीं है, तो वे किसी भी दिशा में फंडिंग के पेमेंट्स के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।

उदाहरण के लिए, फंडिंग के पेमेंट्स हर 8 घंटे में 00:00 UTC, 08:00 UTC और 16:00 UTC पर AscendEX के सभी फ्यूचर्स परपेचुअल कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए होते हैं। अगर ट्रेडर्स के पास उपरोक्त तीन फंडिंग समय पर कोई पोजीशन नहीं है, तो वे किसी भी दिशा में फंडिंग के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।

4.    फंडिंग रेट्स प्लेटफॉर्म द्वारा स्वचालित रूप से केल्कूलेट किये जाते हैं। उपयोगकर्ता किसी भी समय AscendEX पर रियल-टाइम और ऐतिहासिक फंडिंग रेट्स को देख सकते हैं।

 

फंडिंग रेट मैकेनिज्म के बारे में

फंडिंग रेट मैकेनिज्म की फॉर्मेशन परपेचुअल स्वैप मार्केट के गुणों से जुड़ी है। एक परपेचुअल कॉन्ट्रैक्ट और एक ट्रेडिशनल फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट के बीच सबसे महत्वपूर्ण अंतर यह है कि परपेचुअल फ्यूचर्स की कोई एक्सपायरी या सैटलमेंट की तारीख नहीं होती है। इसका मतलब यह है कि लिक्विडेट हो जाने तक उपयोगकर्ता अनिश्चित समय तक के लिए अपनी पोजीशन्स को होल्ड कर सकते हैं। हालांकि, एक्सपायरी की तारीख या डिलीवरी की तारीख, ट्रेडिशनल फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट ट्रेडिंग में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, यानी यह सुनिश्चित करना कि कॉन्ट्रैक्ट की प्राइजेस अंतर्निहित एसेट के मूल्य के अनुरूप हों। जैसे ही डिलीवरी की तारीख नजदीक आती है, सैटलमेंट मैकेनिज्म फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट और अंतर्निहित एसेट के बीच प्राइजेस के कन्वर्जेन्स को फोर्स करेगा।

परपेचुअल स्वैप मार्केट कॉन्ट्रैक्ट की प्राइज को अंतर्निहित एसेट की प्राइज के अनुरूप कैसे रखता है? यह वह जगह है जहां फंडिंग के रेट्स आते हैं। इसे सीधे शब्दों में कहें, तो परपेचुलअ फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए फंडिंग रेट मैकेनिज्म ट्रेडिशनल फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट मार्केट पर लागू सैटलमेंट मैकेनिज्म के समान है। फ्यूचर्स और स्पॉट मार्केट्स के बीच लगातार प्राइज के अंतर, और फ्यूचर्स की प्राइज में हेराफेरी के कारण एक्स्ट्रीम प्राइज डेविएशन से बचना सुनिश्चित करते हुए, इन दो मैकेनिज्म्स को कॉन्ट्रैक्ट की प्राइजेस को स्पॉट प्राइजेस के लिए फोर्स करने के लिए डिजाइन किया गया है।

फंडिंग रेट मैकेनिज्म का इस्तेमाल करते हुए, फंडिंग फीस कॉन्ट्रैक्ट्स की प्राइज को एसेट की स्पॉट प्राइज के अनुरूप रखने की कुंजी रखती है। जब कोई प्राइज डेविएशन होता है, तो फंडिंग फीस प्राइज के अंतर को जबरन रेशनल लेवल पर वापस खींच लेगा। उदाहरण के लिए, जब एक परपेचुअल कॉन्ट्रैक्ट की प्राइज बहुत ज्यादा होती है, तो फंडिंग की दर पॉजिटिव होगी, और प्राइज के उच्च अंतर के कारण सेलर्स को ट्रेडिंग के बढ़े हुए जोखिमों का सामना करना पड़ेगा। परिणाम यह होगा कि, बायर्स को फंडिंग शुल्क का भुगतान करके सेलर्स को मुआवजा देना जरूरी होगा। चूंकि प्राइज में एक बड़ा अंतर ट्रेडिंग की अतिरिक्त लागतों को जन्म देगा, यह फ्यूचर्स और स्पॉट मार्केट्स के बीच प्राइज कन्वर्जेन्स को लागू करते हुए, कॉन्ट्रैक्ट प्राइज की हेरफेर की घटना को प्रभावी ढंग से समाप्त करता है।

 

ट्रेडर्स पर फंडिंग रेट्स का क्या प्रभाव है?

फंडिंग रेट्स फ्यूचर्स ट्रेडर्स की ट्रेडिंग की लागत और कमाई की क्षमता में महत्वपूर्ण सेंध लगा सकते हैं। होल्डिंग का आकार जितना बड़ा होगा, ट्रेडर्स को उतनी ही अधिक फंडिंग फीस देनी होगी। चूंकि ट्रेडर लेवरेज के साथ फ्यूचर्स ट्रेड करते हैं, अगर लेवरेज बहुत ज्यादा है, तो फंडिंग फीस का भुगतान करने वाले ट्रेडर्स को भी मार्केट में कम उतार चढ़ाव के बावजूद बहुत नुकसान भुगतना पड़ेगा। 

दूसरी ओर, फंडिंग फीस प्राप्त करने वाले पक्ष के लिए, फंडिंग फीस भी आय के एक प्रमुख स्रोत के रूप में काम कर सकता है, खासकर मार्केट में उतार-चढ़ाव के दौरान। ट्रेडर्स के लिए फंडिंग रेट्स के आधार पर संबंधित ट्रेडिंग रणनीतियां तैयार करके प्रोफिट कमाना संभव है।

 

AscendEX पर फंडिंग रेट का केल्कूलेशन

1.    AscendEX के सभी परपेचुअल फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए फंडिंग पेमेंट्स हर 8 घंटे में 00:00 UTC, 08:00 UTC और 16:00 UTC पर होते हैं। अगर ट्रेडर्स के पास उपरोक्त तीन फंडिंग समय पर कोई पोजीशन नहीं है, तो वे किसी भी दिशा में भुगतान के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।

2.    फंडिंग रेट्स के दो घटक हैं: ब्याज का रेट और प्रीमियम। फंडिंग रेट = प्रीमियम/इंडेक्स प्राइज

3.    फंडिंग रेट्स को हर 60 सेकंड में अपडेट किया जाता है ("अनुमानित फंडिंग रेट्स")।

4.    BTC फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए ऊपरी और निचले फंडिंग के रेट्स की सीमाएं क्रमशः 3% और -3% हैं। अन्य फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए, सीमाएं क्रमशः 5% और -5% हैं।

5.    फंडिंग फीस को USDT में सैटल किया जाता है।

6.    फंडिंग फीस = फंडिंग रेट्स * इंडेक्स प्राइज * होल्डिंग साइज

 

आप फंडिंग रेट्स और काउंटडाउन टाइमर को AscendEX फ्यूचर्स इंटरफेस पर देख सकते हैं:

उपरोक्त इंटरफेस AscendEX के डेस्कटॉप प्लेटफॉर्म का स्टैन्डर्ड फ्यूचर्स इंटरफेस है। AscendEX के डेस्कटॉप प्लेटफॉर्म के पेशेवर फ्यूचर्स इंटरफेस पर या ऐप में फंडिंग रेट्स के आंकड़ों को देखने के लिए कृपया फंडिंग रेट्स की जांच कैसे करेंपढ़ें।